राजनीति और हमारा समाज







1.   राजनीति

दुर्भाग्य से भारतीय राजनीति की यह कमी रही है कि यहाँ अँगूठा टेक आदमी तो पार्षद से लेकर मंत्री बन सकता है, लेकिन राजनीति विज्ञान के छात्रों के लिए प्रचुर अवसर नहीं हैं, लेकिन यह एक सुस्थापित तथ्य है कि यूनाइटेड नेशंस ऑर्गनाइजेशन में केवल राजनीति विज्ञान के छात्र को ही बर्थ मिल सकती है। राजनीति विज्ञान से जुड़े स्रोतों से पता चलता है कि राजनीति विज्ञान न केवल समाज शास्त्र से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह विधि, लोक प्रशासन तथा जन सम्पर्क से भी उतनी ही शिद्दत से जुड़ा हुआ है।
इसीलिए पारीवारिक संगठन का सामाजिक प्रबंधन, श्रम मानकों, श्रम अध्ययन, श्रम प्रबंधन तथा राजनीतिक संपे्रषण जैसे विषय देश-विदेश में प्रचलित हैं। इसलिए इस विषय का चयन करने वाले छात्रों के लिए संभावनाएँ तब और बढ़ जाती हैं, जब वह स्वयंसेवी संगठनों में प्रवेश करते हैं। राजनीति विज्ञान के स्नातक मीडिया में बतौर राजनीतिक पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक या रिसर्चर के रूप में भी अपना करियर बना सकते हैं।

राजनीति विज्ञान के बारे में एक सुस्थापित अभिमत यह है कि राजनीति विज्ञान आईएएस तथा आईपीएस अधिकारियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेजनक रहेगा, क्योंकि इन्हें अपने कर्तव्यों के निष्पादन में अधिकांश समय राजनेताओं तथा राजनीति से ही सम्पर्क में रहना पड़ता है। हमारे यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था कुछ ऐसी है कि यहाँ क्लर्कों को सांसदों, विधायकों तथा मंत्रियों के पीए और सेक्रेटरियों के रूप में नियुक्त करने की प्रवृत्ति बरसों से चली आ रही है, जबकि राजनीतिक विज्ञान के छात्र उनके राजनीतिक ज्ञान के आधार पर उन्हें सहायता प्रदान करने में आदर्श साबित होंगे।

आधुनिक संविधान के तुलनात्मक अध्ययन में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्विटजरलैण्ड तथा एशिया के कुछ हिस्सों को ही शामिल किया गया है। संविधान के बारे में इस तरह के अध्ययन से इनमें प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती है, जो कि छात्रों को न केवल देश में, बल्कि विदेशों में मददगार सिद्ध होगी। इसी तरह एलिमेंट, इंस्ट्रूमेंटल रिवीजन से भी छात्र अत्यधिक लाभान्वित होंगे।


2.    हमारा समाज

समाज अच्छा हो तो चरित्र अच्छा होता है ! हमें सामाजिक होना चाहिए ! समाज ने हमे बहुत कुछ दिया ! ऐसी बहुत सी बाते बातें हम प्रायः सुनते ही रहते हैं । हम ऐसा क्यों नहीं सुनते हैं की ‘हमने समाज को कुछ दिया या हमने दूषित समाज को अच्छा किया ? इसका कहीं न कहीं कारण यह है की हम समाज की परिभाषा ही नहीं जानते, हमें अछे और बुरे समाज का ज्ञान ही नहीं है । हम यह जानते हैं की समाज कुछ होता है लेकिन हम यह नहीं जानते की यह हमारे जीवन, हमारे चरित्र और फिर हमारे देश पर कैसे और क्या प्रभाव डालता है । वैसे तो हमने और आपने बहुत सी परिभाषाएं पढ़ी होंगी जैसे – “Society is the manner or condition in which the member of community live together for their mutual benifit” पर क्या हम किसी भी परिभाषा पर मनन करते हैं ? और अगर करते हैं तो क्या हम उसे अपने जीवन में उतारते हैं ? हम अक्सर इसे दूसरों पर थोप देते हैं, और कहते हैं कि क्या ये सिर्फ मेरी जिम्मेदारी है ? या मैं अकेले क्या कर लूँगा, और या मैं ही अकेले क्यों करूँ ? जबकि एक अकेले भी बहुत कुछ कर सकता है । दलाई लामा जी के शब्दों में — “I truly believe that individuals can make a difference in society. Since periods of changes such as the present one come so rarely in human history, it is up to each of us make the best use of our time to help create a happier world” हम अपने अनुआइयों को कहेते हैं कि अछे समाज में रहें और और बुरे समाज से दूर रहें, पर अच्छा समाज और बुरा क्या होता है ये बताना भी तो हमारा कर्त्तव्य होता है ।

हम सब पहले एक मनुष्य हैं फिर बाद मे और कुछ, हमे अपने समाज के अन्य लोगों के लिए भी कुछ सोचे, उनके लिए कुछ अवश्य करें, नही तो हम मनुष्य कहलाने के हक दार नही है । एक समाज का निर्माण मनुष्यों से होता है । अगर मनुष्यों का चरित्र, व्यवहार, रहन-सहन का स्तर ऊंचा होगा तो हम उस समाज को एक अच्छा और सशक्त समाज कह सकते हैं । प्रत्येक समाज का एक अपना परिचय अवश्य होता है । जैसा समाज होगा उसका वैसा ही उसका परिचय होने के साथ-साथ उस समाज के व्यक्ति का व्यवहार करने का तरिका होगा ।


 अधिक जानकारी के लिए फ्री में पुस्तक मंगवाए निशुल्क मंगवाने के लिए अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर हमें कमेंट में लिखे 


Comments